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Essay About Newspaper In Hindi

समाचार-पत्र का महत्त्व पर निबंध | Essay on Importance of Newspaper in Hindi!

वर्तमान युग विज्ञान का युग है । विज्ञान की कृपा से आवागमन के ऐसे दुतगामी साधन उपलब्ध हो गए हैं कि समूचा देश सिकुड़कर एक बड़ा नगर वन गया है और दूरस्थ राष्ट्र हमारे पड़ोसी बन गए हैं ।

ऐसी स्थिति में अपने पडोसी राष्ट्रों की दैनिक गतिविधियों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने की प्रबल इच्छा रहती है । ममाचार-पत्र हमारी इस इच्छा की पूर्ति में सहायक होते हैं । मुद्रण यंत्र के आविष्कार ने डनके प्रचार-प्रसार में विशेष योग दिया है । इसलिए वर्तमान युग में समाचार-पत्र हमारे जीवन का एक प्रमुख अंग बन गया है ।

हमें इसकी ऐसी आदत पड़ गई है कि प्रात: उठते ही हम उसे पढ़ने के लिए बेचैन हो उठते हैं । समाचार प्राप्त करने के मुख्यत: दो साधन हैं । संसार के प्राय: सभी देशों में वहाँ की सरकार द्वारा अनुशासित कुछ ऐसी न्यूज एजेंसियाँ होती हैं, जो संसार के सभी देशों के समाचार-पत्रों को प्रतिक्षण समाचार भेजती रहती हैं । इस काम के लिए टेलीप्रिंटर का उपयोग किया जाता है । इस यंत्र द्वारा अविलंब समाचार मिलते है ।

इसके अतिरिक्त प्रत्येक समाचार-पत्र के देश-विदेश में अपने वैतनिक संवाददाता होते हैं । वे फैक्स द्वारा समाचार भेजते हैं । सुबह होते ही समाचार-पत्र वितरित करनेवाला हॉकर हमारे घर इच्छित समाचार-पत्र पहुँचा देता है ।

समाचार-पत्र का प्रकाशन एक स्वतंत्र व्यवसाय है । महानगरों से निकलने वाले स्थानीय समाचार-पत्र को एक व्यक्ति अपनी पूँजी लगाकर निकाल लेता है, किंतु बड़े-बड़े समाचार-पत्रों को बड़ी-बड़ी कंपनियाँ प्रकाशित करती हैं । उनके अंतर्गत बहुत से विभाग और कर्मचारी काम करते हैं । समाचारों का संपादन करने के लिए एक प्रधान संपादक होता है ।

उसका विभाग संपादकीय विभाग कहलाता है । प्रधान संपादक की सहायता के लिए कई उप-संपादक होते हैं । संपादकीय विभाग के अतिरिक्त बिक्री विभाग, विज्ञापन विभाग, पत्र-व्यवहार विभाग, प्रिंटिंग और कंपोजिंग विभाग आदि भी होते हैं । ये सब विभाग परस्पर सहयोग से काम करते हैं ।

समाचार-पत्रों से अनेक लाभ हैं । इनसे हमें प्रतिदिन देश-विदेश के सभी क्षेत्रों के समाचार घर बैठे प्राप्त हो जाते हैं । इनसे हमारे ज्ञान में वृद्धि होती है और हम उनसे बहुत कुछ सीखते हैं । संसार की ज्वलंत समस्याओं को हमारे सामने प्रस्तुत कर वे हमें उनके संबंध में विचार करने का अवसर देते हैं । व्यापारिक वस्तुओं के विज्ञापन के ये लोकप्रिय साधन हैं । यदि कोई व्यापारी अपने माल की खपत बढ़ाना चाहता है तो वह समाचार-पत्र का ही आश्रय लेता है ।

सरकार भी अपने आदेशों का प्रचार-प्रसार करने के लिए समाचार-पत्र को ही साधन वनाती है । इस प्रकार शासक और जनता के बीच निरंतर संपर्क बना रहता है । यदि देश अथवा विदेश में कोई ज्वलंत राजनीतिक समस्या उठ खड़ी होती है तो उसके संबंध में राजनेताओं तथा जनता के विचार हमें समाचार-पत्र द्वारा प्राप्त हो जाते है ।

समाचार-पत्र शासन-नीति की आलोचना कर जनता को उसके प्रति सतर्क रखते हैं । वे जनसाधारण के कष्टों और कठिनाइयों को सरकार के सामने रखकर उनके निवारण के लिए अपील करते हैं । इस प्रकार वे शासक और शासित के मध्यस्थ बनकर दोनों के बीच ठोस संबंध स्थापित करते है ।

समाचार-पत्रों से कुछ हानियाँ भी होती है । विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अपने दल के हितार्थ समाचार-पत्रों के माध्यम से असत्य का प्रचार करते रहते हैं । इससे जनता गुमराह हो जाती है और राष्ट्रीय एकता को धक्का पहुँचता है । कभी-कभी समाचार-पत्र झूठे समाचार प्रकाशित कर शासन के विरुद्ध हलचल पैदा कर देते हैं । कभी-कभी व्यापारी उनके द्वारा अपने माल की अवांछनीय प्रशंसा कर जनता को ठग लेते हैं ।

कामोत्तेजक विज्ञापन और अश्लील चित्र छापकर अखबार जनता का चरित्र बिगाड़ देते हैं । वे भिन्न-भिन्न संप्रदायों, राजनीतिक दलों, जातियों तथा सामाजिक संस्थाओं के बीच मनोमालिन्य बढ़ाने से भी नहीं चूकते । सांप्रदायिक दंगों के भड़काने में उनका बड़ा हाथ रहता है । इन गुणों और दुर्गुणों के होते हुए भी जनतंत्रात्मक युग में समाचार-पत्र का अपना महत्त्व है ।

समाचार-पत्र स्वतंत्र देश के सजग प्रहरी होते हैं । देश की प्रत्येक ज्वलंत समस्या के प्रति स्वस्थ जनमत तैयार करना और संपूर्ण विश्व को एकता की श्रुंखला में जोड़ना उनका मुख्य ध्येय है । इस ध्येय की पूर्ति में जो समाचार-पत्र सहायक होते हैं, उन्हीं से देश का मस्तक ऊँचा होता है ।

समाचार पत्र का महत्व, उपयोगिता व लाभ | Newspaper Importance, Benefits and use in hindi

अगर हम समाचार पत्र के बारे में ऐसा कहें कि यह हमारे सुबह की पहली जरूरत है, तो यह गलत नहीं होगा. हममें से कुछ लोग तो ऐसे है, जिन्हें  बिना समाचार पत्र पढे सुबह की चाय पीना भी पसंद नहीं . याद कीजिये दीपावली और होली का दूसरा दिन जब समाचार पत्र की अनुपस्थिति में हमारी सुबह सूनि-सूनि सी होती है. साल में  यही दो-तीन दिन होते है, जब हमें सुबह समाचार पत्र प्राप्त नहीं होता, अन्यथा अन्य सभी दिन हर सुबह बहुत ही अनुशासित ढंग से हमें हमारा समाचार पत्र प्राप्त होता है. चाहे वह बारिश भरी रात हो या ठंड से भरी सुबह हमें हमारा समाचार पत्र रोज की ताजा खबरों के साथ अपने घर की दहलीज पर मिल ही जाता है.

अगर हम समाचार पत्रों का इतिहास जानने की कोशिश करे तो यह बहुत ही प्राचीन है, कहा जाता है कि इसकी शुरवात कोलकाता मे हुई थी. पहले समाचार पत्र एक क्षेत्र विशेष तक ही सीमित था, परंतु नित  नये आविष्कारों के चलते सूचना का आदान प्रदान तुरंत संभव हो सका. साथ ही साथ छपाई कला में भी दक्षता आई. आजकल कई ऐसी मशीने उपलब्ध है, जिसकी सहायता से चंद घंटो मे हजारो की संख्या में प्रतियाँ तैयार हो जाती है. इन सभी आविष्कारों के चलते समाचार पत्र एक क्षेत्र तक सीमित न रहकर देश विदेशो तक पहुँच गया है.

आज हम घर बैठे दुनिया के हर देश हर कोने की जानकारी समाचार पत्र मे पढ़ सकते है. आज कल पाठक की सुविधा का ध्यान रखते हुये हर भाषा में समाचार पत्र उपलब्ध है, जिसमें खेल कूद, बिज़नेस, राजनीति, शासन प्रशासन आदि कई सारी जानकारी इसमें पाठक को उपलब्ध कराई जाती है. आजकल कई समाचार पत्रों का प्रकाशन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी होता है, जिससे देश विदेश कि जानकारी मिलती है. समाचार पत्रों में  कुछ पेज किसी क्षेत्र विशेष के भी होते है, जिसमें वहाँ की समस्याँ और जानकारी दोनों प्रकाशित की जाती है.

समाचार पत्र के प्रकार  (Type of  Newspaper):

कुछ समाचार पत्र क्षेत्र विशेष में प्रकाशित होते है, तो कुछ अंतर्राष्ट्रीय स्तर की न्यूज़ कवर करते है. हर तरह की न्यूज़ और प्रकाशन के आधार पर न्यूज़ पेपर को कई भागों में  विभाजित किया गया है. समाचार पत्र के प्रकार को हम नीचे तालिका मे दर्शा रहे है :

  समाचार पत्र के प्रकार
समाचार पत्र का प्रकार      वर्णनउदाहरण
National news paper (राष्ट्रीय न्यूज़ पेपर)इस तरह का न्यूज़ पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की खबरों को प्रकाशित करता है, परंतु इसका मुख्य प्रकाशन देश के स्पेसिफिक एरिया की खबरों पर होता है.The Success Times
Regional news paperइस तरह के न्यूज़ पेपर मे मुख्यत लोकल न्यूज़ को मान्यता दी जाति है. यह मुख्यतः एक शहर और उसके आस पास के गाँव से संबन्धित खबरों को प्रकाशित करता है.Bath chronicle
Local news paperइस तरह के समाचार पत्रो मे पूरे देश की खबरों को प्रकाशित किया जाता है. इस समाचार पत्र में अंतराष्ट्रीय खबरों को भी प्रकाशित किया जाता है.
  • The daily express
  • The guardian
Tabloid news paperइस तरह के समाचार पत्र में  राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय खबरों को एक फॉर्मल तरीके से प्रकाशित किया जाता है. यह समाचार पत्र का सबसे बड़ा प्रकार है.
  • The Times
  • The Independent

आज के समय में समाचार पत्र :

आज के समय में समाचार पत्र केवल सुचनाओ को प्रदान करने का साधन मात्र नहीं रह गया है, अपितु इसमें हर वर्ग के लोगों को मान्यता प्रदान की गयी है. इसमें देश विदेश की खबरों के साथ साथ खेल, मनोरंजन, पढ़ाई, चटपटी हर तरह की ख़बरे होती है.  हँसी मजाक, साहित्य धर्म आदि से जुड़े लेख भी मौजूद है. सरकार पर आलोचनात्मक लेख हो या बड़े बिज़नस का पर्दा फ़ाश सब कुछ हर समाचार पत्र में निडरता से प्रकाशित किया जाता है . बॉलीवुड हॉलीवुड की खबरों को भी विशेष मान्यता दी जाती है, कई समाचार पत्रो में इसके लिए एक पेज ही अलग होता है. आजकल युवाओ के लिए हर समाचार पत्र में अलग से जॉब पोर्टल होता है, जिसमें वे जॉब वेकेंसी के बारे मे जानकारी प्राप्त कर सकते है.

कई के माध्यम से युवाओ को अपने कैरियर को लेकर मार्गदर्शन दिया जाता है. बच्चों की रुचि का ध्यान भी समाचार पत्रों द्वारा रखा जाता है, उनके लिए समाचार पत्रों में अलग से काँलम होता है.  कुछ समाचार पत्रों द्वारा अलग से पुस्तिकाओ का प्रकाशन किया जाता है, जिसमें  बच्चों के लिए अलग-अलग एक्टिविटी होती है. कई समाचार पत्रों द्वारा तो बच्चो के लिए उपलब्ध इन पुस्तिकाओ के माध्यम से बहुत बड़े स्तर पर प्रतियोगिताओ का आयोजन किया जाता है, जिससे बच्चो की प्रतिभा भी सामने आती है. आजकल इन सब चिजों के साथ-साथ समाचार पत्र में विज्ञापन की भरमार भी होती है. चाहे किसी नए प्रॉडक्ट का लॉंच हो या शादी से सबंधित विज्ञापन हो या जॉब अलर्ट या सरकारी विज्ञापन आदि सभी समाचार पत्रों की कमाई का प्रमुख स्त्रोत है.

समाचार पत्र  का इतिहास (History of  Newspaper)

सबसे पहला समाचार पत्र वाइसराय हिक्की द्वारा “बंगाल गज़ट” नाम से बंगाल में शुरू किया गया था.  हालाँकि इसके पहले भी कई पन्नेनुमा पत्रों का उपयोग सूचनाओ के आदान प्रदान के लिए किया जाता था. परंतु बंगाल गज़ट ही सबसे पहला पूर्ण रुपेन अखबार है, क्युकी पहले अखबार अग्रेज़ी भाषा मे होते थे, तो यह जनसमान्य के लिए उपयोगी नहीं थे, यह केवल अंग्रेज़ो के उपयोग का साधन मात्र थे. सबसे पहला हिन्दी समाचार पत्र सन 1826 मे “उदंम मार्तड” नाम से प्रकाशित  हुआ. यह एक साप्ताहिक अखबार था, परंतु इसे 1827 में ही दबाव के चलते बंद करना पडा. इसके बाद अंग्रेज़ो के विरूध्द संघर्ष करते हुये बंगालदूत, समाचार सुधा वर्षण, केसरी, वंदे मातरम आदि समाचार पत्रों का संपादन किया गया.

समाचार पत्रों की उपयोगिता/लाभ  (Benefits and use of Newspaper):  

समाचार पत्र हमारी रोज की आदत के साथ-साथ हमारे लिए बेहद उपयोगी भी है, इसकी उपयोगिता अलग-अलग क्षेत्रों में अलग है| आईये हम इसकी कुछ उपयोगिता पर प्रकाश डालते है.

  • आजादी का हथियार बना : जब अंग्रेज़ो का शासन था, तब जनता अंग्रेज़ो की प्रताड़णा से तंग आकर असहाय बनी हुई थी. ना तो कोई उनकी सुन रहा था, न ही कोई उनके दुखों को कम कर रहा था. ऐसे में उस समय के अखबारो में क्रांतिकारियों द्वारा दिये गए लेख लोगों में जोश का साधन बने और उनमें नयी स्फूर्ति भर दी.
  • देश विदेश की जानकारी : कई ऐसे न्यूज़ चेनल है, जिनमें हर न्यूज़ को प्रसारित किया जाता है, परंतु फिर भी समाचार पत्रों की अपनी एक अलग पहचान है. रोज समाचार पत्र पढ़ना और उसमें देश विदेश के समाचार प्राप्त करना, लोगों के जीवन का अहम हिस्सा है.
  • मनोरंजन का साधन : आजकल समाचार पत्रों में न्यूज़ के साथ साथ मनोरंजन के लिए भी खास चीजे होती है. समाचार पत्रों में हॉलिवुड बॉलीवुड, कहाँनियाँ कई चीजे होती है, जो मनोरंजन के लिए खास है. आज के समय में कई अच्छे और बड़े अखबार मुख्य अखबार के साथ-साथ छोटी प्रतियाँ भी देते है, जो मनोरंजन का साधन बनती है.
  • खेल को अलग पहचान देना: हम घर बैठे, किस क्षेत्र में किसने क्या उपलब्धि हासिल की तुरंत जान लेते है| कोई भी खेल चाहे वो क्रिकेट हो या टेनिस उससे जुड़ी हर खबर हमें तुरंत हासिल हो जाती है. यह ख़बरे हमें जानकारी देने के साथ साथ खिलाड़ियो के मन में उत्साह भी भरती है. इन खबरों से खिलाड़ी तथा खेल दोनों को ही अलग पहचान मिलती है.
  • बच्चों के लिए उपयोगी :  समाचार पत्रों  ने अपने बाल पाठ्को पर ध्यान देना भी प्रारंभ कर दिया है| वे उनके लिए अलग पत्रिकाओ के साथ-साथ कई तरह की प्रतियोगिताये भी आयोजित करते है| जिससे उनके मनोरंजन के साथ साथ उन्हे कई जानकारी भी मिलती है, साथ ही रीडिंग हेबिट्स भी बढ़ती है.
  • विज्ञापन के जरिये चिजों की जानकारी : समाचार पत्रों मे प्रकाशित विज्ञापन के जरिये हम जॉब, वैवाहिकी जैसी कई जानकारी प्राप्त कर सकते है. आजकल समाचार पत्रों में कोई भी नयी वस्तु चाहे वो मोबाइल हो या कार या किचिन से संबंधित कोई चीज उसका विज्ञापन हमे तुरंत देखने मिलता है और हमें इन चिजों की तथा इनकी कीमत की जानकारी मिलती है.
  • सरकारी योजनाओ की जानकारी : कोई भी सरकारी योजना हो चाहे उसमें कोई परिवर्तन किए गए हो या उसे नया लॉंच किया गया हो, उसकी जानकारी हमें तुरंत समाचार पत्रों में उपलब्ध होती है. ताकि हम उसे जानकर उसका फायदा ले सके.

समाचार पत्रों की कमियाँ  (Drawback of Newspaper):

वैसे तो समाचार पत्रों के कई लाभ है, परंतु हर वह चीज जो हमारे लिए उपयोगी है, उसकी कुछ कामिया भी होती है. ठीक इसी प्रकार हमारे समाचार पत्रों की भी कई कमियाँ है जिन्हे हम यहाँ बता रहे है:

  • विज्ञापन की अधिकता : प्राचीन समय में समाचार पत्र केवल खबरों के प्रकाशन के लिए काम आते थे. परंतु आजकल समाचार पत्रो में लाभ कमाने के उद्देश्य से विज्ञापन की अधिक्ता हो गयी है. पाठक अपना समाचार पत्र खबरों को पढ़ने के उद्देश्य से खरीदते है और विज्ञापनो की भरमार के कारण उनके हाथ निराशा आती है.
  • प्रभावशाली व्यक्ति का प्रभाव : कई बार हम देखते है कि हमारे लोकल समाचार पत्रों में प्रभावशाली व्यक्ति का प्रभाव नजर आता है. कई बार किसी व्यक्ति विशेष से संबन्धित खबरों को छुपाया जाता है, तो कई बार कुछ खबरों को बढ़ाचढ़ा कर प्रस्तुत किया जाता है.
  • क्षेत्र विशेष की खबरों को प्रधानता : आज के समय में क्षेत्र विशेष में विज्ञापन की कमाई के लिए राष्ट्रीय अखबारो में राष्ट्रीय न्यूज़ को प्रधानता ना देकर उसमें लोकल न्यूज़ को ज्यादा प्रधानता मिलने लगी है.
  • समाचार पत्रों की भाषा में परिवर्तन : पूर्व में समाचार पत्रों की भाषा पूर्ण रूप से साहित्यिक होती थी, परंतु अब ऐसा नहीं है. आज के समय में भाषा बदल चुकी है. साहित्य से संबंध रखने वाले व्यक्ति आज भी चाहते है कि उनके लिए समाचार पत्रों द्वारा अच्छी शैली में कुछ विशेष सम्पादन किया जाये . जिससे आने वाली पीढ़ी को भी साहित्यिक शैली का ज्ञान हो.
  • कुछ खबरों के प्रकाशन में विलंब : समाचार पत्रों का कार्य प्रणाली के अनुसार इसमें दिनभर की खबरों को एकत्रित किया जाता है. फिर इन खबरों रात में छपाई करके सुबह वितरित किया जाता है. कई बार ऐसा होता है कि छपाई की प्रक्रिया पूर्ण होने के कारण कुछ अहम ख़बरे प्रकाशित होने से वंचित रह जाती है और इनके प्रकाशन मे विलंब होता है.

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Sneha

स्नेहा दीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनकी रूचि हिंदी भाषा मे है| यह दीपावली के लिए कई विषयों मे लिखती है|

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